Dhoond
Is not only a simple poem, it’s a thought given by my Grandmother, ढूंड, ढूंड, तुझे सुबह मिलेगी, सूरज नहीं! ढूंड, रोशनी मिलेगी तुझको, किरणें नहीं!! सागर के किनारे लहरे मिलेगी, सागर की गहराई नहीं. जिंदगी मिली तुझको, जिंदगी की समझ नहीं. खेल कूदके तुझे शरारती बचपन मिली, ठहरी नहीं, मिली जवानी भी नही ठहरेगी. ना ठहरा है वक़्त, ना ठहरेगी वक़्त की लाड़िया. गुज़र जाएगी, साथ ही जीवन की ये घड़िया. बुढ़ापा नज़ाने कब मौत के दरवाजे पे दस्तक देगा! ढूंड, ढूंड, सबकुछ मिलेगी तुझको, असलमे कुछ नहीं. धन, दौलत, सोहरत और मुस्कुराते मुहरत, साथ ना रहेगी. जब ना रहेगी दो बूँद आंशु, ...