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Dhoond

Is not only a simple poem, it’s a thought given by my Grandmother, ढूंड, ढूंड, तुझे सुबह मिलेगी, सूरज नहीं! ढूंड, रोशनी मिलेगी तुझको, किरणें नहीं!!   सागर के किनारे लहरे मिलेगी,               सागर की गहराई नहीं. जिंदगी मिली तुझको, जिंदगी की समझ नहीं. खेल कूदके तुझे शरारती बचपन मिली,             ठहरी नहीं, मिली जवानी भी नही ठहरेगी. ना ठहरा है वक़्त, ना ठहरेगी वक़्त की लाड़िया.            गुज़र जाएगी, साथ ही जीवन की ये घड़िया. बुढ़ापा नज़ाने कब मौत के दरवाजे पे दस्तक देगा! ढूंड, ढूंड, सबकुछ मिलेगी तुझको,                  असलमे कुछ नहीं. धन, दौलत, सोहरत और मुस्कुराते मुहरत,                  साथ ना रहेगी. जब ना रहेगी दो बूँद आंशु,        ...

Galati nahin gunha humne kiya jo jindegise mohabbat humne kiya...

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Life and success is like a greasy pole. Just when you think you have made the top perch all your own, you would be confused about your place. ग़लती नहीं गुनाह हम ने किया,              जो जिन्दगी से मोहब्बत हम ने किया. किशमत ने दी ठोकर तो चोट सर पे या बदन पे नहीं,              सीधे दिल पे लगी, घायल दिल को Ambulance मिला कोई अपने का सहारा नही,           Hospital मे एक बेड मिला, कोई खूबसूरत Nurse नहीं, दोश्तो से कैसी शिकायत,           कोई नौकरी, कोई छोकरी के पीछे भगा, मुझे तो अपने साए का भी साथ ना मिला,           जब अंधेरी काली घटा छाया. मेरे हर छ्के को Umpire ने एक उंगली से इशारा किया,           मैं एक अच्छा खिलाड़ी हो के भी, एक्सट्रा प्लेयर मैं गिना गया. बस ख्वाब और ख्वाहिशे ही है,          जो अबतक होशला दिल मे बनाए रखा.             ...